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Saturday, 9 November 2013

तुम्हारे लिये :-)

तुम मेरे जैसे क्यों नहीं हो ???????????
खैर इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं हैं मैंने ही चुना हैं इस बेदर्दी को :-)
कुछ बातें तुम्हारे लिये -


" कहने  को तो "हमदर्द" बहौत हैं मेरे. .
. .और हर "दर्द" इन हमदर्दों की "हमदर्दी" है. . !"

क्या कसूर था के ग़ालिब इश्क़ कर बैठा,
ता उम्र गुजर गई इम्तिहान देते-देते.."

बुलंदियों को पाने कि ख्वाइश तो बहुत है मगर ,
तुम्हारी तरह दूसरों को रौंदने का हुनर कहाँ से लाऊं .... ??"


 थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद,
अब कोई अच्छा भी लगे तो हम इज़हार नहीं करते...;-)

 एक नफरत ही है जिसे दुनिया लम्हों में ही जान लेती है,वरना चाहत का पता लगाने में तो जमाने बीत जाते हैं.

"मौसम बदल रहा है तुम अपना ख्याल रखना,
बदलता मौसम और बदलते लोग बहुत तकलीफ देते हैं..:-)"


3 comments:

कुछ अधूरे से किस्से said...

very good.. ye kya-kya likh diya tumne...
really very nice... :)

sarika bera said...

achcha nahi hain kya????
khair jaisa hunar aapme hain utna to nahi hai mujhme
par fir bhi aajkal bs thoda thik thak likh lete hai jee:-))

sarika bera said...

are haa thank you G.....KYA BAT HAIN AAPKO WAQT TO MILA....:-))