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Sunday, 9 March 2014

क्या कह दू मैं तुम्हें ???

आज तक जिंदगी की बहुत सारी यादों को कहानियों का रूप दिया हैं पर पहली बार ब्लॉग पर कोई कहानी लिख रही हू यक़ीनन यह हमेशा मेरे दिल के बहुत करीब रहेगी मेरे लिए यह महज एक कहानी नहीं मेरी भावनाएं व मेरी सोच हैं आज ख़ुशी और गम दोनों बराबर हैं :-)

उसे मेरे शहर में रहते हुए शायद काफी वक़्त हो गया था 
अब वक़्त-बेवक़्त वो मुझे कभी रोड पर चलते हुए तो कभी अपने कॉलेज में नजर आ जाया करती थी 
जब पहली बार उसे देखा तब से ही ना जाने क्यों अपना सा एहसास हुआ था 
पर वो अभी तक मेरे वजूद से रुबरु नहीं हुई थी 
फिर आज से करीब तीन-साढ़े तीन साल पहले वो वक़्त आ ही गया जब खुदा ने उससे मेरी पहली मुलाकात करवायी आज उसने पहली बार मेरी कुछ लाइन्स सुनी थी कि -
"फासले तो केवल दूरियां बढ़ाते हैं 
करीब आओगे तो जान जाओगे कि हम क्या हैं "
और यक़ीनन आज तक सबसे ज्यादा अच्छे से मुझे उसी ने जाना व पहचाना था 
वो मेरी इन लाइन्स को सुनकर वक़्त के साथ थोड़ा ठहर गयी थी 
जिसने आज तक मेरी तरफ पलटकर नहीं देखा था 
मुझे लगता था कि वो लड़कों से डरती हैं और आज मेरे इस भ्रम को टूट जाना था 
वो मेरे करीब आयी और बोली सर लगता हैं आपको लिखना बहुत पसंद हैं 
(शायद मेरी उम्र और मेरे अनुभव ने उसे सर कहने को मजबूर किया होगा )
मैं अवाक् था उसकी आवाज सुनकर जो लोग मुझसे कहते थे कि 
मेरी आवाज अच्छी हैं अगर वो लोग उस दिन उसकी आवाज सुन लेते तो शायद उनका भी भ्रम टूट जाता 
मैंने अपनेआपको थोड़ा सम्भालते हुए कहा जी हां बहुत पसंद हैं 
पर प्लीज सर मत कहिए ना मैं कोई सर-वर नहीं हू 
बेशक वो बाकि लड़कियों की तरह नहीं थी उसने ना मुझे शक्ल-सूरत से आँका और ना ही उम्र व अनुभव से नापा-तौला तथा बिना झिझक के मेरे नंबर लेते हुए बोली  तब तो अपनी बहुत बनेगी 
सच हैं जब आदतें और शौक एक से हो तो इंसान भी एक से ही लगते हैं :-)
जी नंबर किस नाम से सेव करुँ ???
ओहो..... आदित्या, आदित्या नाम हैं मेरा और तुम्हारा ????
जी अक्षिता ..........
मुझे विश्वास नहीं हो रहा था पर वो ऐसी ही थी बिल्कुल निश्चल बच्चों सी सब पर विश्वास करने वाली 
यह बात नहीं हैं कि मेरी जिंदगी में आयी वो पहली लड़की थी 
पर वो पहली लड़की थी जो मुझे मेरी तरह समझती थी 
वो पहली लड़की थी जो मेरा आदर,मेरी इज़ज़त व मेरा सम्मान उसी तरह किया करती थी जैसा मैं चाहता था 
वो मेरे जिंदगी में तब आयी जब मैं अकेला व तनहा था और शायद उस वक़्त उससे बेस्ट कोई हो ही नहीं सकता था नंबर थे हमारे पास पर अभी तक दोनों ही के पास बात करने की कोई वजह नहीं थी 
आख़िरकार शुरुआत मुझे ही करनी पड़ी मुझे लगा नहीं तो कहीं उसके मोबाइल से मेरे नंबर ही गायब ना हो जाए सो एक दिन कॉल कर ही दिया बस सिलसिला शुरू हो गया था हमारी बातों का 
वो मेरी तारीफ़ करने का पल कभी बर्बाद नहीं करती थी 
वोव आप कितना अच्छा लिखते हो मुझे अपनी कहानियाँ व सारी डायरीज दे दो ना पढ़ने के लिए ???
यह महज उससे मिलने का बहाना था अब लिखना मेरे हर दिन में शामिल हो गया था शायद उसके पढ़ने के लिए अब वो शायद मेरी जासूसी करने लगी थी और शायद होता भी ऐसा ही हैं कि हम जिन्हें चाहते हैं 
जो हमारी जिंदगी में मायने रखते हैं हम उनके बारे में सब-कुछ जान लेना चाहते हैं 
एक दिन कॉल करते ही शिकायती लहजे में बोली अच्छा तो जनाब आप पत्रकार भी हो और बताया भी नहीं ?
आपको नहीं पता कि मुझे मीडिया वाले और रेडियो वाले बहुत अच्छे लगते हैं :-)
मैं हंस दिया था वो हमेशा मेरी बातों के आगे निरुत्तर हो जाया करती थी फिर भी बहुत बार उसे कहने के लिए मेरे पास शब्द नहीं  होते थे अब वक़्त-बेवक़्त मैं उसे याद कर लिया करता था 
उसकी सारी आदतें मुझे मेरे पहले प्यार की याद दिला देती थी 
और यक़ीनन वो मेरे प्यार की बहुत इज्जत करती भी थी 
वक़्त बीतता गया और मेरे लिए उसके मायने बदलते गए 
उसे मैं एहसास नहीं कराना चाहता था पर अब मैं उससे भी प्यार करने लगा था 
मेरे लिए प्यार के मायने क्या होते हैं यह बात वो भी बहुत अच्छे से जानने लगी थी 
मैं अब उसे रोड पर चलते हुए देखकर उसे तकने लग जाता था 
वो ऑनलाइन हैं या नहीं यह देखने के लिए अब मैं दिनभर ऑनलाइन रहा करता था 
अब वो मेरी आदतों में शुमार होने लग गयी थी वक़्त-बेवक़्त मुझसे नाराज हो जाया करती थी 
पर मैं उसे मनाने की गलती कभी नहीं करता मेरा मानना हैं कि किसी को भी चाहत का एहसास मत करवाओ वरना उनकी चाहत और ज्यादा बढ़ जाती हैं फर्क पड़ता था उससे पर उसके सामने यू रिएक्ट करना जरुरी था कि मेरे लिए तुम्हारा होना और ना होना कोई मायने नहीं रखता इसलिए मुझे उसे कभी मनाने की जरुरत ही नहीं पड़ती वो वक़्त के साथ खुद ही मान जाती बस !!!!
रेगिस्तान में बरसात की बूंदो सी थी वो 
कभी गर्मियों में ज्येष्ठ-आषाढ़ की जगह अगर बारिश क्ष्रावन में हो जाती तो उसका मैसेज आता मेरे अंदर का पत्रकार कह रहा हैं कि कल की ब्रैकिंग न्यूज़ होगी पहले बहुत तरसाया पर अब हरसाया 
बच्चों के एक्साम्स के वक़्त पेपर आउट हो जाता तो मैसेज आता कल की न्यूज़ एक शैतान बच्चे की हरकत ने किया पर्चा आउट तो कभी पुरुषों की जात ने फिर से किया देश को शर्मसार तो कभी उफ्फ आज फिर से आंतकियों ने की भारत में घुसपैठ। .......... 
अक्सर मैं उसके मैसेज पे अवाक् रह जाता था 
अब अक्सर मैं उसे एहसास कराने की कोशिश भी करता कि वो मेरे लिए जरुरी हैं तो भी वो कह देती मैं अपनी जगह जानती हू अक्सर सब ठीक चल रहा होता हैं तभी वक़्त बुरा बन जाता हैं :-)
वो बहुत दूर चली गयी एक दिन यू ही बेवजह पर मुझे विश्वास हैं मैं फिर मिलूगा उससे !!
अभी तो बहुत सारे राज जो बताने हैं, बहुत कुछ कहना हैं ना उससे :-)

6 comments:

Kailash Sharma said...

कोमल अहसासों को चित्रित करती बहुत सुन्दर कहानी...

Ramkrishna Vajpei said...

सुन्दर कहा नी

sarika bera said...

sir m bahut khush hu.....aaj m aapka blog padh rahi hu wakai kya likhte hai aap uske mukabale me mera likha to mujhe zero najar aa raha hai.....main aapki sari posts pe comments kar nahi sakti wakai shbd nahi h mere pas aapki posts ke liye.....sir aap mere blog pe aate ho main aapki bahut aabhari hu........:-)
bahut-2 shukriya.....

sarika bera said...

G aabhar sir.....
par jab main yah likh rahi thi tb mujhe pata nahi chala ki kahani likhi kaise jati hai so maine mahaj kuch incidents ko kahani ka rup de diya bs......:-)
aap aaye bahut-2 aabhar.....

Prasanna Badan Chaturvedi said...

वाह...प्रभावी रचना.....बहुत बहुत बधाई...

sarika bera said...

bahut-2 aabhar sir......