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Friday, 21 March 2014

मुझको हुआ प्यार......

अरे भई ! यू क्या आप तो सीरियस ही हो गए ,
चलिए छोड़िए जी प्यार शब्द को वैसे भी मैंने पहले ही कहा हैं कि प्यार को शब्दों में बांधना या इसे परिभाषित करना अपने बस में कहाँ ??
खैर छोड़िए मुद्दे की बात यह हैं कि किसी दिन सुबह उठो तो उठते ही अच्छा सोचना शुरू कर दो सच में पूरा दिन बहुत अच्छा जायेगा जो चाहोगे वो पाओगे आज मेरे साथ तो ऐसा ही हुआ वैसे अजमेर शायद हमेशा से मेरे लिए लकी ही रहा हैं इसे राजस्थान का ह्रदय भी तो कहा जाता हैं 
अगर आप कभी अजमेर नहीं घूमे हो तो आपको जरुर घूमना चाहिए 
अजमेर के पास में ही पुष्कर हैं जिसे तीर्थों का मामा कहा जाता हैं 
पुष्कर झिल को सबसे पवित्र झील माना जाता हैं खैर अब वो कितनी पवित्र हैं यह तो आप उसे देखकर ही बता सकते हैं 
हां तो आपने सही समझा मुझे प्यार हुआ अजमेर से 
वैसे मुझे नहीं लगता कि अजमेर कि घाटी जितनी खतरनाक हैं ना वैसी कहीं और भी होगी क्या इस दुनिया पर बस मुश्किल भरे रास्तों से सफ़र थोड़े ही रुकता हैं यह तो तय करना ही पड़ता हैं :-)
वैसे ना मुझे आजकल के लोगों का प्यार समझ में नहीं आता हैं और थोड़ा अटपटा भी जरुर लगता हैं 
बेचारे घूमने जाए तो लड़की को कितनी परेशानी उठानी पड़ती मुँह कैसे बांधती हैं ना उफ्फ …… मेरी तो जान ही चली जाए लड़का भी तो बेचारा क्या कुछ सहन नहीं करता हैं हूह ……घूमने नहीं जाए साथ में वक़्त ना बिताए तो कौनसा प्यार कम हो जाता हैं वैसे भी प्यार जताने से ही प्यार रहे तो क्या जताना ???
अरे बाबा !आप कोई बुरा मत मानिए मैं भी इन्हीं लोगों में आती हू खैर अपना प्यार और अपनी दूनिया पेरेंट्स तक ही सिमटी हुई हैं यह अलग बात हैं :-)
उफ्फ मैं फिर से टॉपिक से भटक गयी खैर मुझे लगता हैं कि भटकाव ही जीवन हैं सच्ची तभी तो मेरा बावरा मन कभी कहता हैं टीचिंग लाइन में जाना चाहिए तो कभी कहता हैं नहीं-२ बैंकिंग ठीक रहेगा तो कभी अरे छोड़ ना सारिका इन सबको चल बना ले कागज और कलम को अपनी जिंदगी :-)कि तभी मेरा दिमाग बोल पड़ता हैं अच्छी नहीं यह सपनों की उड़ान चल उठा तबला और माँगना शुरू कर दे हूह मांगना भी तो कहाँ आसान हैं बहुत हिम्मत झुठानी पड़ती हैं बाबा तभी तो आज तक उससे उसके अकाउंट के पासवर्ड तक नहीं माँग सकी हे-हे-हे-हे-हे-हे :-)
हम्म फिर भटक गए एक्चुअली याद हैं मुझे 17th दिसंबर 2012 को पहली बार मैं "दरगाह "गयी थी अगर आज तक आपने दरगाह नहीं देखि हैं तो आपने बहुत कुछ मिस कर दिया हैं मुझे अंदर जाते ही ना जाने क्यों शांति और सुकून सा अहसास हुआ था उस दिन से उस दरगाह से लगाव सा हो गया था याद हैं मुझे दरगाह से आते ही मैंने कैसे सबको कॉल करके बताया था कि आज मैंने दरगाह देख ली इसलिए अब जब भी कभी अजमेर जाना होता हैं तो मैं दरगाह को मिस नहीं कर सकती :-)बस तेरा मोह न छूटे !!
खैर अब बात आज की करते हैं सुना हैं कि जम्मू-कश्मीर जन्नत सी जगह हैं पर सच्चे फरिश्तों के दर्शन आज मुझे अजमेर में हो गए थे वैसे आज का दिन था ही बहुत अच्छा सबसे पहले सुनील जी सर ने ऑल दे बेस्ट जो बोला था पुरे रास्ते खुश थी एग्जाम भी ठीक ही हुआ था कि एक फोटोकॉपी की शॉप पे जाना हुआ अंकल ने फोटोकॉपी कर दी पर चेंज पैसे ना ही मेरे पास और ना ही उनके पास थे सो उन्होंने कहा बिटिया आपका काम हो गया ना बस पैसे आप रहने दीजिए बताओ भला ऐसे इंसानों को कभी भुलाया जा सकता हैं क्या ?????
वैसे बात पैसों की नहीं बात इंसानियत की होती हैं जी :-)
वहाँ से मुझे महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी इन शॉर्ट "एमडीएस 'जाना पड़ा पर वहाँ बैठा स्टाफ बड़ा निर्दयी निकला बहुत मिन्नतें करने के बाद भी मेरी नहीं सुन रहे थे कि मुझे लगा अब पापाजी को कॉल करना चाहिए पर कैसे क्यूंकि मेरे पास तो मोबाइल होता ही नहीं हैं कि किन्हीं गार्ड अंकल के पास गयी पहले तो उन्होंने मुझे देखा फिर बोला आजकल तो भेड़-बकरी चराने वाले भी मोबाइल रखते हैं और बेटा एसटीडी तो अब गुजरे ज़माने की बातें हैं मैं उनकी इस बात पे मुस्कुरा दी थी पापाजी से बात करके वापिस ऑफिस में जाकर एक बार और सर से बात करने का निर्णय किया मैंने पर वो थे कि टस से मस ही ना हुए तो अब मैंने अंत में हारकर औरत के सबसे बड़े हथियार का उपयोग करना ही बेहतर समझा जी हां आप ठीक समझे अब मेरी गंगा-जमना बहने लग गयी और यक़ीनन हर आदमी औरत के आंसुओं के आगे पिगल जाता हैं अब देखिए आप भी जब मेरी पोस्ट पढ़ो ना तब कमेंट जरुर कीजिए वरना हां ठीक समझे आप मैं रो दूंगी जो लोग पिछले दो घंटे से मेरा काम नहीं कर रहे थे यू ही इधर उधर के रूम में भटका रहे थे उन्हीं लोगों ने अब दो मिनट में मेरा काम कर दिया था 
आज समझ में आया मुझे आंसू इतने महंगे क्यों हैं ????
सच्ची दुनिया जितना मजाक उड़ाती हैं ना जिंदगी उतना ही रंग लाती हैं 
मैं महज दस मिनट रोई थी पर अब मैं पिछले दस घंटे से हंस रही हू हेहहेहेह……………… 
खास कि उसने भी मेरे आंसुओं की कीमत को पहचाना होता :(
एनीवे आज का दिन बहुत ही स्पेशल ,अच्छा व खास था :-)
वैसे आज इस पोस्ट को लिखने में भी मैं बहुत भटक गयी हू सो चलिए अपने शब्दों को विराम देते हैं !!!!!
वैसे आज इस पोस्ट का टाइटल होना चाहिए था अटपटा भटकाव :-)

2 comments:

Manoj Sharma said...

आपका लिखने का स्टाइल बहुत अच्छा है, ऐसा लगता है जैसे आमने - सामने बात हो रही हो ,खैर बहुत शुक्रिया ,और आपकी तारीफ़ इन पंक्तियों से होनी चाहिये,[ ऐसा मुझे लगता है ],

" यूँ तो कोई बात नहीं है तुझमें , पर तुझसा कोई देखा हो ऐसा भी नहीं ",

sarika bera said...

thanks........