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Sunday, 15 December 2013

खास यू होता,हर शाम साथ तू होता :-))

जिंदगी का सबसे मुश्किल वक़्त हम अकेले अनजानी सी राहों पर
ना मंजिल का पता ना राहों की खबर :-))
अजनबी शहर में अकेले तन्हा ,बेवजह वक़्त की फिक्र
अपनों से दूर रहने का गम :-((
एक अनजान सा शहर अनजाने से लोग
बेशक वक़्त के साथ-साथ वहाँ के लोगों के चेहरे भी थोड़े
जाने-पहचाने से लगने लग ही जाते हैं :-))
तंग गलियाँ बेपनाह भीड़
जिसमे दूर-दूर तक ना कोई अपना नजर आये
"तब दिल कह उठता है खास -
इस भीड़ में कोई अपना भी होता 
गर पर लड़खड़ाते तो उसकी बाँहें थाम लेते :-))"
इस भीड़ से दूर जाने के लिये थोड़ा उसके साथ ठहरते 
किसी की आँखों में खोने के लिये 
थोड़ा जिंदगी की खुशियों का गणित मिलाते ;-))


कभी अकेले बैठकर सोचती हू खास कोई ऐसा अपना होता 
जिसके साथ कुछ देर बैठते ,बिना कहे वो सब-कुछ सून लेता 
जिसके साथ हम अपने दिल में दबे सारे राज खोल देते 
जिसके महज होने भर से अपनी दुनिया बदल जाती :-))
"आई मीन कभी-कभार भावनाओं को शब्द देना मुश्किल हो जाता हैं :-))"
ऊफ्फ आज फिर से वो बात याद आ गयी तुम्हें भी याद हैं ना ?????
कि -
शब्दों में क्या रखा हैं ,भावनाओं को समझो 
हा....हा ...…हा …हा … :-))
जस्ट चिल सारु। ……। सेन्टी कहीं की :-))

"इस दिल की जिद्द हो तुम वरना 
इन आँखों ने हसीन बहुत देखे हैं :-))" 

3 comments:

Rajak Haidar said...

उफ्फ... लाजवाब... और कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हूं मैं।

sarika bera said...

koi bat nahi waise bhi main to un logo me se hu jo bin kahe hi samajh jate hain:-))

sarika bera said...

dard pahle se hain jyada khud se kiya fir ye wada
khamosh najare rahe bejuban:-))
ab main bhi or jyada kuch kahne ki sthiti me nahi hu
ha...ha..ha....ha....lol