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Monday, 20 January 2014

तुम ही.....:-)

 (१)-सब कहते हैं मैं एक खुली किताब हू
 अब तुम ही इस दिल के किसी एक "राज" को बता दो ना !!

(२ )-सब कहते मैं खुश हू
तुम ही इन आँखों में छुपी नमी को बयां कर दो ना !!

(३ )-सब कहते हैं कि मैं एक खामोश दरिया हू
तुम ही इस दिल में छुपे जज्बातों को बहा दो ना !!

(४ )-सब कहते हैं मैं दीवानी हू सिर्फ तुम्हारी
तुम ही सारे आशिकों के नाम उजागर कर दो ना !!

(५ )-सब कहते हैं मैं जी सकती हू बिन तुम्हारे भी
अब तुम ही सबको हमारे वज़ूद से रूबरू करवा दो ना !!

16 comments:

Digvijay Agrawal said...

आपकी लिखी रचना बुधवार 22/01/2014 को लिंक की जाएगी...............
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
आप भी आइएगा ....धन्यवाद!





Kaushal Lal said...

बहुत सुन्दर .....

सुशील कुमार जोशी said...

सुंदर !

राकेश श्रीवास्तव said...

सुंदर रचना !

sarika bera said...

lot of thanks sir G...:-)

sarika bera said...

thank you....

sarika bera said...

bahut-2 aabhar sir...:-)

sarika bera said...

thank you......

Digamber Naswa said...

बहुत खूब .. कुछ एहसास लिए हर लम्हे को लिखा है ..

sarika bera said...

bahut-2 aabhar sir.....
bs thodi si koshish ki hain G...:-)

Neeraj Kumar said...

बहुत खूब ..

yashoda agrawal said...

शुभ प्रभात
जीती रहो..
लिखती रहो
छपती रहो
सादर.....

sarika bera said...

aabhar......!!

sarika bera said...

बहूत-२ आभार मैम :-)
बस सब आपकी दुआओं और आशीर्वाद का रहमोकरम हैं जी !!

sarika bera said...

aapke blog pe main comment hi ni kar paa rahi hu id khulane me itna jyada waqt kyun lagta hain.....?????
actually mujhe wo tik-tik wala logo apne bhi blog pe lagana hain bahut achcha laga so kya aap help kar denge...??????
please....:-)

sarika bera said...
This comment has been removed by the author.