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Friday, 9 May 2014

शादी ,……शादी……शादी :-)

हाहाहाहाहा………ऐसा मत सोचिए कि कहीं मैं बावली तो नहीं हो गयी हूँ :-)
क्यूंकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ हैं :(
एक्चुअली पहली बार एक साथ इतनी सारी शादीयां देख रही हुँ 
सो बस थोड़ी सी एक्साइट हू ,हर पल खूशी से गा रा हैँ 
हम्म वैसे सही भी हैं कि मैं बावली हूँ 
क्यूंकि कभी-कभार मैं हद से ज्यादा खुश हो जाती हूँ तो 
कभी-कभार बेवजह अपनी खुशियों से मुँह मोड़ लेती हूँ :(
कभी-कभार किसी अपने को दुखी कर देतीं हू 
तो कभी-कभार किसी अपने की वजह से मैं बेहद दुःखी हो जाती हूँ :-)
खैर बात शादियों की हैं 
बहुत व्यस्त हूँ फ़िर भी वक़्त-बेवक़्त वक़्त से समझौता करके 
इस तीसरी दुनिया के लिए भी थोड़ा वक़्त निकाल ही लेती हूँ :-)
कल  मेरी पुरानी दोस्त सरोज मुवाल(चौधरी) की शादी थी 
सुबह के हालात ओर मेरे व राम के बिच क़ी नाराजगी को देखतें हुए 
मैं शादी में नहीं जाना चाहती थी पर मेरे पापाजी क़ी क़िसी बात 
को भला मैं कभी टाल सकती हू क्या ??
सुशील संग सरोज जस्ट वाओ……really they are made for each other...
सुशील जी बेहद sincere ,समझदार व् भले इँसान लगे मुझे :-)
हां कल मैने शादी के लिए कुछ बातें नोटिस की 
आफ्टरऑल किसी रोज हमारा भी तो नम्बर लगेगा 
हेहेहेहेहे.......इतनी बुरी भी नहीं होती हैँ शादी के बाद की दुनिया :-)
हां तो बातें यह हैं 
एक्चुअली जिस भी इंसान से शादी होगी  आइ जस्ट होप कि 
वो इंसान पहले मेरा यह ब्लॉग पढ़ लें कम से कम यह पोस्ट तो पढ ही लें :-)
हां तो जनाब आज तक मैंने शूज या फ्लैट चप्पल ही पहनीं हैं 
तो मेरे लाइक चप्पल लाने का ही कष्ट करें वरना 
कहीं सरोज की तरह मेरे कदम भी ना लड़खड़ा जायें 
वो जमाना गया जब इंसान की पहचान जूतों से होती थी समझेँ ??
प्लीज दुनिया के दिखावे से इतर मेरे बारे में भी सोचना और 
ड्रेस वैसी लाना जिसमें कम से कम वर्क हो ,जिसका वजन बेहद कम हो 
आपका रिश्ता मुझसे होगा ना कि कपड़ों से और इस दुनीया के दिखावे से ,हैँ ना ??
चूड़ियाँ हाहाहाहा लें आना जितनी चाहों उतनी मुझे बहूत पसन्द हैं :-)
प्लीज सोने से थोड़ी दूरी बनाकर ही रखना क्यूंकि मैँ अपनी नींद नहीं खो सकति :-)
हां बिच राहों में मेरा हाथ कहीं नहीं छोड़ना जैसे कि फेरों के वक़्त नहीं छोड़ोगे:-)
सच मैं हर चीज़ सह सकती हूँ पर अपनों से दूरियाँ नहीं :-)
अगर आप मेरे लिए अच्छे हो तो बेशक मैँ आपके लिए ऊससे कहीँ ज्यादा अच्च्छी बनकर रहूँगी :-)
हां मेरे पापा से दहेज मत लेना ना हाहाहाहाहा मुझे पढ़ा दिया काफि नहीं हैँ क्या ??
और डोंट वरी मैं खुद कमाकर अपना व अपनों का पेट भर सकती हूँ :-)
हां सरोज ने विदाई के वक़्त अपनी आँखों में एक आंसू तक़ नही आने दिया 
प्राउड ऑफ यू सरोज ,जिस दिन जरुरत हो तब मुझे भी इतनी सी हिम्मत दे देना प्लीज :-)
कुछ तो लोग कहेंगे ,लोगों का काम हैं कहना 
एक्चुअली हमारे यहाँ रस्म हैं विदाई के वक़्त रोने की सो :-)
हां अगर आपने कभी गांव की शादी नहीं देखीं हैं तो 
कर लीजिए मुझसे दोस्ती क्यूंकि मैं हू रहने वाली गांव क़ी 
तो आपको बुलाऊगी भी ओर गांव की शादी भी दिखाऊगी वक़्त आने पर :-)
अमेजिंग मोमेंट्स एक डीजे साउंड के पीछे……………देखेंगे तब समझेंगे :-)
उफ्फ पता नहीं मैं लिखते वक़्त भी ईतना गोल-२ क्यों घूम जाती हू ??

फाइनली लग रहा हैं इस पोस्ट को पब्लिश की जगह सेव कर देना चाहिए :(
हेहेहेहेहेहे :-)
नहीं बाबा अगर सेव कर दिया तो वो मेरा ख्याल कैसे रखेंगे ??

6 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

थोड़ा बड़े अक्षर होते तो हम बूढ़ों को चश्मा नहीं लगाना पड़ता फिर भी पढ़ ही डाला अच्छा है :)

Yashwant Yash said...

गुड :)

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...



बना रहे बावलापन...
मस्त लिखा है...
:)


Digvijay Agrawal said...

आपकी लिखी रचना बुधवार 14 मई 2014 को लिंक की जाएगी...............
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

Digamber Naswa said...

"एक्चुअली जिस भी इंसान से शादी होगी आइ जस्ट होप कि
वो इंसान पहले मेरा यह ब्लॉग पढ़ लें कम से कम यह पोस्ट तो पढ ही लें :-)"

और मेरे जैसे जिसको हो गयी वो क्या करे ... वैसे मैं भी मज़ा ले रहा हूँ इस पोस्ट का ...

dr.mahendrag said...

अच्छा है मन में जो कुछ आया कह डाला