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Wednesday, 31 December 2014

उफ़.....दर-बदर बदलता यह वक़्त :-)

वक़्त कभी भी अच्छा या बुरा नहीं होता हैं
यह महज वक़्त भर होता हैं ........
इसे अच्छे या बुरे का नाम हम व् हमारी परिस्थितियां देती हैं
लो यह साल भी फिर बदल गया :-(
नए साल के साथ ही कितना कुछ बदल जाता हैं ना. .......
हमारे सपने, हमारी उम्मीदें, हमारा हौसला और और बेशक हमारे संकल्प भी
साल ,में हम कितने संकल्प लेते और पूरा......
हुह होता नहीं महज एक छोटा सा संकल्प भी :-(
मैं कभी कोई संकल्प नहीं लेती क्यूंकि मुझसे निभते नहीं हैं
क्यों लेने हर रोज नए-नए संकल्प ???
मेरा मानना हैं क्यों ना हम अपने कर्तव्यों को निभाकर एक जिम्मेदार नागरिक बने
बस बेस्ट संकल्प तो यहीं होगा शायद......
हां मुझे हड़ताल नाम की चीज़ से सबसे ज्यादा नफरत हैं
हा हा हा ......भारत में यह चीज़ बहुत बड़े यन्त्र की तरह यूज़ की जाती हैं
बिना सोचे-समझे,.............
खश कि हड़ताल करने वाले लोग एक पल को इसके अंजाम को भी सोच लें
मैं ना तो किसी आंदोलन को सही ठहराउगी और
ना ही किसी चीज़ के लिए की गयी हड़ताल को ठीक मानती हूँ
क्यों ना थोड़ा इंसानियत का फ़र्ज़ निभाएं
जो नहीं मिलता उसके लिए मेहनत करें ना कि हड़ताल
बहुत कुछ बदला हैं 2014 में और काफी कुछ बदल जायेगा आने वाले सालों में
कहाँ हैं बुराई मुझे तो नजर नहीं आती तो भी हम हर पल बुराई-२ क्यों चिल्लाते रहते हैं ??
समाज के लोगों को मिलकर ही समाज को अच्छा बनाना होगा
रोड पर चिल्लाकर "भ्रष्ट्राचार खत्म करों" ,
"बलात्कारियों को फांसी दो" etc नारे लगाने से सूरत व सीरत नहीं बदलेगी
इसके लिए शुरुआत हमें ही करनी होगी
अपने आपसे, अपने परिवार से व अपने ही समाज से
बाकि बदलावों का इतिहास'रचने की तो हमारी कोई "ज़िद्द" हैं ही नहीं जी :-)
हां मैं कौनसा संकल्प लूँ आज ??
कौनसी बुराई हैं जिसे छोड़ूँ ??
चलो इस साल आप लोग सलाह देना ताकि अगले साल हो
सका तो मैं भी कोई नया संकल्प लूंगी :-)पर आज तो अपना ऐसा कोई नेक इरादा नहीं हैं जी
हां पिछले दिनों एक पोएट्री की बुक पढ़ी थी
अब हमें भी त्रिवेणी, हाइकू व नज्म जैसे शब्द थोड़े से समझ आने लगे हैं
चलिए इसी बात पर हम पेश करते हैं आज अपनी चुनी हुई एक त्रिवेणी-
"एक से घर हैं सभी , एक से बाशिंदे हैं
अजनबी शहर में कुछ अजनबी लगता ही नहीं !

एक से दर्द हैं सब, एक से ही रिश्ते हैं :-)!!"

WISH YOU A VERY HAPPY NEW YEAR TO ALL!!

पता नहीं लिखना क्या था और ना जाने लिख क्या दिया हैं :-(

6 comments:

संजय भास्‍कर said...

खट्टी-मीठी यादों से भरे साल के गुजरने पर दुख तो होता है पर नया साल कई उमंग और उत्साह के साथ दस्तक देगा ऐसी उम्मीद है। नवर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

मन said...

आने वाला पल जाने वाला है....

sarika choudhary said...

सर यह साल वाकई बहुत बेहतरीन रहा....शुक्रिया😊

sarika choudhary said...

😊

sarika choudhary said...

😊

sarika choudhary said...

सर यह साल वाकई बहुत बेहतरीन रहा....शुक्रिया😊