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Monday, 19 October 2015

हां नहीं हैं विश्वास:(

चलो अब फिर से अपनी इस दुनिया को थोडा वक़्त देते हैं:)
तुमने एक पल में ही मेरी धडकनों को कैसे छलनी कर दिया था यह कहकर कि तुम्हें तो मुझ पर विश्वास ही नहीं हैं
एक पल को तो बेहद बुरा लगा, बहुत गुस्सा आया तुम पर
अगले पल को होश संभाला तो पाया कि हां तुमने कुछ गलत भी तो नहीं कहा,
हां नहीं हैं मुझे तुम पर विश्वास :)
जनाब विश्वास बनाना पड़ता हैं
तुम पर तो मुज्गे अपने आपसे ज्यादा विश्वास था
पर एक बार कुछ खो जाए तो वो वापिस पहले जैसा कभी नहीं रह पाटा पता पाता हैं:(
हा नहीं हैं तुम पर विश्वास तब से जब टी तुमने मेरे अलावा भी किसी और की ओर हाथ बढाया था साथ देने के लिए
फिर चाहे उस वक़्त कोई ग़लतफ़हमी ही वजह क्यूँ ना रही हो?
हां नहीं हैं विश्वास तब से जब तुमने मुझे असफल होता देखकर मुज्ग्से मुझसे मुहं मोड़ लुया लिया था
हां नहीं हैं विश्वास तब से जब तुमने मुझे गिरता हुआ देखकर भी मेरे क़दमों को संभाला नहीं था:(
हां नहि नहीं हैं विश्वास तब से  जब तुमने अपनी जिंदगी को मेरे साथ बांटना बंद कर दिया😐
धत....नहीं चाहिए अब तुम्हारा विश्वास खुश हूँ मैं सुन रहे हो ना तुम....नहीं नहीं पढ़ रहे ही ना??

बहुरुपिया😊

बहुरुपिया मतलब अलग-2 रूप धारण करने वाला......बचपन से मैं बहुरूपियों का खेल देखती आई हूँ.....बहुत छोटी थी मैं....याद हैं मुझे पुरे गांव में खबर फ़ैल जाती थी कि आज बहुरुपिया आया हैं....उसके आते ही....खासकर हम बच्चों को तो उसके आते ही पता चल जाता हैं.....फिर सात दिन के लिए हमारी दुनिया वो ही हो जाती थी.....दिनभर सोचना आज क्या बनेगा बहुरुपिया....और शाम को उसके आते ही उसका साथ एक पल को भी ना छोड़ना....वो आगे हम बच्चे पीछे......पता ही नहीं चलता था कब उसके रंग में हम भी रंग जाते थे.....सच बताऊ तो वो हमारे लिए सलमान खान से भी ज्यादा मायने रखता था.....हम उसके साथ दौड़ते-भागते बिना छोटे-बड़े का फर्क किये.....तब पता ही नहीं चला था कि यह तो बेचारा सबके सामने रूप बदलता तो हैं आगे कि दुनिया में तो ऐसे इंसानों से भी सामना होगा जो गिरगिट से भी ज्यादा रंग बदलेंगें वो भी बिना किसी को बताये केवल अपना स्वार्थ साधने के लिए......

खेर शायद हमें कुछ छोटी-2 चीजों को साधकर रखना चाहिए क्यूंकि कुछ लोगों का पेट हो सकता हैं केवल उन्हीं छोटी चीजों की वजह से ही पाला जाता हो...

अभी इन दिनों फिर से बहुरुपिया आया हैं.....पर हम बच्चों की जगह दुसरे बच्चों ने ले ली हैं....हम थोड़े बड़े हो गए हैं इतने बड़े कि बहुरुपिए की फोटो तक ले सकते हैं

सच बचपन जितना अमीर कोई नहीं हो सकता.....उसकी अमीरी का अपना आनंद हैं.....एक दुआ मांगू तो कबूल करोगे ना भगवानजी???

जीने दो ना एक बार फिर से बचपन.....छोटा-बड़ा को पीछे छोड़कर सब समान हैं कि भावना सिख लेने दो ना....

वैसे मेरे पास एक आईडिया हैं पर क्या करूँ अगर मैं बच्चों सी जीने लगी तो कुछ तो लोग कहेंगें ना चलो छोड़ो भी अब बडपन को ही जी लेते हैं😊

Friday, 19 June 2015

यस वी आर बैंकर्स☺


जिंदगी कभी आसान नहीं होती हैं, पर इससे दोस्ती करने पर वाकई बहूत खुबसूरत सी लगती हैं यह....दो पल मुस्कराहट हैं यह तो चार शिकायतों की कहानी...समझ ही नहीं पाती हूँ बहुत बार इसे...अच्छा व बुरा सब-कुछ तो समेटकर रखती हैं यह अपने में....किसी भी फील्ड में जाकर हम पहली बार काम करते हैं तो हमें बहुत सारी सम्स्यओं का सामना करना ही पड़ता हैं किसी को कम तो किसी को ज्यादा पर वो वक्त् कहा आसान लगता हैं....नए बच्चों को अपनी जगह अपने दम पर बनानी ही पड़ती हैं.....सीनियर्स की आँखें मासुम सी जान को पल में डरा देती सि नजर आती ही हैं....तुम्हें कुछ नहीं आता....उफ़्फ़ ऊपर से गलती से भी कोई गलती हो जाए तो शामत आ ही जाती हैं.....पर ना...ना...
वी आर बैंकर्स....हम इतनी आसानी से हार नहीं मान सकते....हमें आगे बढ़ना ही होगा....अपनी जगह बनानी ही होगी....सीनियर्स को बताना ही होगा कि सर हमारी और आपकी जनरेशन अलग हैं पर इन्सानियत हमेशा एक जैसी ही होती हैं....हमारे लिए भी कोई सी भी राह व मंजिल उतनी आसान नहीं थी जितना आपको लगता हैं.....हमें कुछ नहीं आता तो आप सीखा दीजिए....हम आप ही के तो बच्चें हैं दो कदम को उंगली थामकर चलना सीखा दीजिए😇कोई भी परफेक्ट नहीं होता हैं और हम भी नहीं हैं.....पर मैं खुशनसीब हूँ मेरे ऑफिस के लोग बेहद ही अच्छे हैं....छोटी-बड़ी प्रोब्लम्स तो जिंदगी में वैसे बी हमेशा चलती ही रहती हैं:)
प्राउड टू बी ए बैंकर😆