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Monday, 13 February 2017

मायरो-2 :)

हां सुबह की सारी परेशानियों को दूर करके अब फिर से अपने कार्यक्रम की यादों को ताजा करते हैं तो अपने गांव की गौशाला हैं श्री देवनारायण गौशाला सेवा समिति जिसका अकाउंट हैं डेगाना sbbj बैंक में, गौशाला शुरू की हैं तब से आज तक गौशाला में आये हुए एक-एक रुपये का हिसाब हैं अकाउंट में, पहली बार गायों के लिए सबने दिल खोलकर पैसे दिए हैं और खूब बारिश हुई हैं करीब 14-15 लाख रुपये दानरूपी मिलें हैं प्रोग्राम में गायों के लिए, सब दानदाताओं का जिक्र तो मेरे लिए करना शायद मुश्किल हैं पर एक कोई अच्छे महाशय थे उन्होंने सीधे गुप्तदान के रूप में 11000 रुपये डाले थे अकाउंट में अच्छा लगा, हमारे ग्रामसेवक सर भी 11000 का चेक देकर गए थे जिसकी फोटो भी दिखा रहे हैं हम आपको.....छोटे-छोटे कुछ बच्चे जिन्हें बस बाबजी से सम्मानित होना था उन्होंने भी अपनी और से पैसे दिए सोचिए उन्होंने चॉकलेट व बिस्कुट खाने से ज्यादा जरुरी गायों के लिए देना उचित समझा...हां सुखदेव जी महाराज बिना किसी एक रुपये के तीन दिन अपनी सेवा पुरे निस्वार्थ भाव से देकर गए हैं व अपनी और से 500 रुपये भी गायों के लिए...यह होता हैं अपना मन...धन होना जरुरी नहीं हैं वो तो हाथ का मेल होता हैं आज हैं कल को नहीं होगा, अपना दिल बड़ा होना व देने का भाव होना बहुत जरुरी हैं...वैसे भी कहावत हैं कि
"चिड़ी चोंच भर लें गई नदी ने घटियों नीर
दान दिया धन ना घटे कह गए दास कबीर!!"
सबका शुक्रिया...आभार..!!
बस सभी के सहयोग से यह दुनिया चलती रहें इससे बेहतर शायद कुछ हो ही नहीं सकता!!
पूरी कोशिश करती हूँ कि जाने अनजाने में न ही कोई गलती करूँ और न ही किसी को मेरी वजह से बुरा लगे फिर भी कोई गलती हो जाएं तो अपनी बच्ची समझकर, अपनी छोटी बहन मानकर माफ़ कर देना...बड़े अच्छे होते हैं ना, बच्चों का बुरा थोड़े ही मानते हैं!! :)

नानी बाई रो मायरो- 1 :)

अपने गांव में नानी बाई रो मायरो
कार्यक्रम का आयोजन हुआ था तीन दिन का...सब लोगों के व अपनों के सहयोग से कार्यक्रम बेहद सफल रहा हैं...हमारे कथावाचक सुखदेव रामस्नेही महाराज थे नागौर वाले...शुक्रिया आभार...मेरा प्रणाम बाबजी को!! :)
और कुछ फोटोज व बातें जरुर शेयर करूंगी आपके साथ...बस महज कोशिश भर हैं अपने गांव की कुछ अच्छी चीजों को सहेजने की व सबके साथ शेयर करने की!! :)😍

Tuesday, 7 February 2017

माँ :)

मैंने खूब शिकायतें सुनी कि उनके बच्चे जॉब लगने के बाद उनसे बात नहीं करते पर, यह नहीं करते, वो नहीं करते, अब वो बड़े हो गए हैं पर मैं कहती हूँ हर बच्चा चाहे कितना भी बड़ा क्यों ना हो जाएं पर वो हमेशा एक कोना अपने पेरेंट्स का रखता हैं जहाँ वो चाहता हैं कि कोई आएं उसे अपनी गोद में सुलाएं, उसके सारे ग़मों को पल में रफ्फु कर दें, उसकी सारी बातें सुनें, उसके सारे गम भुला दें, पल में उसे अपना सा एहसास दें जाएं!!