Followers

Wednesday, 12 March 2014

शुक्रिया-शुक्रिया......

यह ब्लॉग मेरा मीन्स मैं मेरी जिंदगी की ही बातें लिख सकती हू ना
और बाबा इंसानों की तरह ही लिखना आता हैं मुझे
नहीं लिखी जाती झूठ-मूठ की कहानियाँ मुझसे और
सच में कभी ऐसा होता नहीं हैं कि कोई मेरे लिए चाँद-तारे तोड़ लाए और मैं हंस पडू,
मैं किसी का दर्द बाँट लू और अपने हिस्से की कुछ ख़ुशी उनके नाम करू
बेरंग सी हैं अपनी ही जिंदगी तो कैसे दूसरों की जिंदगी में रंग भरने के ख्वाब पालू ??
सपने  खुद के ही पुरे नहीं किये जाते कैसे दूसरों को दिखाऊ ??
हिम्मत और हौसला तो दो कदम भी चलने का नहीं हैं तो कैसे उस आसमां को नापने की बातें करू ??
ख्वाहिशें खुद की ही हमेशा दम तोड़ती हैं कैसे दूसरों की उम्मीदों को बढ़ाऊ ??
इस जमीं पर रहा नहीं जाता इंसान बनकर ही तो कैसे मैं फरिश्ता बन जाऊ ??
खैर आज वक़्त हैं किसी रूठे को मनाने का
यह दुनिया ना बड़ी अजीब हैं और उससे भी कहीं ज्यादा अजीब हैं यहाँ के रिश्ते :-)
हुह.…एक इंसान हैं जो पिछले दो-तीन सालों से कभी मुझे दौड़ाकर तो कभी कभी-कभार चलाकर आगे बढ़ने के लिए मजबूर करता जाता हैं बस सारिका जी थोड़ा और कि मंजिल मिल जायेगी बस थोड़ा और.…
वक़्त-बेवक़्त मेरी नाराजगी बर्दाश्त करता हैं कभी कुछ कह देने पर मेरी डाँट भी सून लेता हैं पर हमेशा मेरी, मेरे ऊसूलों की व मेरी बातों की बहुत इज्जत करता हैं :-)
मेरे पेरेंट्स के अलावा एक यह इंसान ऐसा हैं जिसे मेरी तकलीफों से दर्द व मेरी ख़ुशी से इसे सुकून मिल जाता हैं जो मुझसे बिना कुछ चाहे हमेशा बेवजह मेरी हेल्प करने के लिए तैयार रहता हैं :-)
हर मेरे गम में मुझे यह याद आ जाता हैं शायद इसलिए कि यह मेरा दर्द थोड़ा बाँट लेता हैं
गॉड गिफ्ट के तौर पर शायद भगवानजी ने यह रिश्ता दिया हैं मुझे
कैसे दोस्ती की शुरुआत हुई थी ना मेरे पास फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट आयी और फिर मैसेज फिर वो बात मैं कभी नहीं भूल पाउगी आपने कहा था कि कल भी फेसबुक पर आना ना मैंने कहा कल किसने देखा हैं और वैसे भी कितना दुखियों की तरह रहती थी मैं उस वक़्त मुझे कहाँ था मेरा होश देन आपने कहा-
"प्लीज आप एक बार मेरे लिए कल देखो ना और सच में उस दिन से कल को देखना शुरू कर दिया "!!
इसे हमेशा मुझसे शिकायत रहती हैं कि आप इतना लिखते हो कभी तो मेरे बारे में भी लिख दो
चलो आज लिख दिया लेकिन ज्यादा अच्छे से आपको डिफाइन नहीं कर पायी हू उसके लिए माफ़ी चाहती हू
और शायद आपको डिफाइन करने के लिए मेरे पास शब्द भी कम हैं
और वो इंसान हैं "सुरेश चौधरी"
i m sure we will be friends forever....lot of thanks for being my friend n a part of my life...:-)
मुझे नहीं पता कि रिश्तों की परिभाषा क्या होती हैं कैसे निभाए जाते हैं क्या सही और क्या गलत हैं ???
मैं केवल इतना जानती हू कि जिन्हें दुनिया से छिपाना पड़े जिन्हें हम दूसरों के सामने बताने से कतराये वो भला रिश्ते होते ही कहाँ हैं ???
यह शायद मेरे पेरेंट्स की परवरिश ही हैं जिन्होंने मुझे बहुत सुलझे हुए विचारों का बनाया
जिन्होंने मुझे झूठ और फरेब से सख्त नफरत करना सिखाया जिन्होंने मुझे हमेशा सही और गलत का अर्थ समझाया जिन्होंने मुझे व मेरी बातों को हमेशा स्वीकार किया जब-२ उन्हें वो ठीक लगी
जिन्होंने मुझमें प्यार, प्रेम, निश्चलता व सच्ची भावनाओं को जिन्दा रहने दिया !!
खैर लाइफ को इतना नहीं बांटना चाहिए सो बस अब काफी हैं हम्म.…………

12 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

सुंदर !

Digamber Naswa said...

लिखा तो इंसानों की तरह ही है बाद नदी की रवानगी और भोले पान का एहसास मिला कर ... जो दिल के करीब हो कर गुजार जाता है ... सलामत रहे आपकी दोस्ती ...

sarika bera said...

bahut-2 aabhar sir.....:-)

sarika bera said...

bahut-2 aabhar sir......
also i think so.....:-)

अभिषेक कुमार अभी said...

सुंदर सुंदर

sarika bera said...

शुक्रिया-शुक्रिया..

SURESH CHOUDHARY said...

vese yaar mein ab kiya likhu aapne itna kuch likh diya........ muje aisa hi frd chahiye tha jo meri b ijjt kre aur vo frd muje mil gya n dosti m kbi kuch dekhaa nh jata jb aap jaise frd mil jaaye .......... mein b itna lucky hu na ki aap jaisa mujse sachhe dil vala dost mila .... so m hmesaa god se pray krta hu ki m aur aap hmeshaa aise dost bne rhe ..... so ..........................................................hmmmmmmmmmm n thanks a lot

sarika bera said...

hehehehehhehehhehehehhe.................

Yashwant Yash said...

यह दोस्ती यूं ही बनी रहे।


सादर

sarika bera said...

hmmmmmmmmmmmmmmm..............ya kyun nahi.......:-)

संजय भास्‍कर said...

सलामत रहे आपकी दोस्ती ...

sarika bera said...

so nice of u sir...:-)